बोले IG शैलेन्द्र सिन्हा – शिक्षक ही गढ़ते हैं देश का अनुशासित भविष्य; गोमिया में बोकारो के 21 CBSE स्कूलों के श्रेष्ठ शिक्षकों को सहोदया ने नवाज़ा
65 गुरु, एक मंच और सम्मान का वो पल… तालियों से गूंज उठा गोमिया का पिट्स मॉडर्न स्कूल
VARNAN DIGITAL DESK
बोकारो। शिक्षक की भूमिका महज कक्षा में पाठ पढ़ाने तक सीमित नहीं होती। वे बच्चों के व्यक्तित्व को आकार देते हैं, उनमें अनुशासन और संस्कार का बीजारोपण करते हैं और आने वाले कल के जिम्मेदार नागरिकों की नींव रखते हैं। इसी भावना को समर्पित एक यादगार शाम शनिवार को गोमिया स्थित पिट्स मॉडर्न स्कूल में सजी, जहां शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 65 श्रेष्ठ शिक्षकों को ‘गुरु वशिष्ठ पुरस्कार 2026’ से सम्मानित किया गया।

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डॉ. राधाकृष्णन सहोदया स्कूल्स कॉम्प्लेक्स, बोकारो के तत्वावधान में आयोजित इस गरिमामयी समारोह में बोकारो जिले के 21 प्रतिष्ठित सीबीएसई विद्यालयों के चयनित शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र और मेडल प्रदान कर उनके समर्पण, सेवा और शिक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को सलाम किया गया। “गुरु : पेशे से परे, शिक्षण और जीवनभर प्रेरणा” की थीम पर आयोजित समारोह ने जहां शिक्षकों के योगदान को मंच दिया, वहीं विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में कला, संस्कृति और संवेदना के रंग भी भर दिए।
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समारोह के मुख्य अतिथि उत्तरी छोटानागपुर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) शैलेन्द्र कुमार सिन्हा (भापुसे) ने ज्ञान दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अपने संबोधन में उन्होंने शिक्षकों को समाज और राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए कहा कि देश का भविष्य केवल किताबों से नहीं, बल्कि अनुशासन, संस्कार और निरंतर मार्गदर्शन से तैयार होता है और इसमें शिक्षकों की भूमिका सबसे अहम है।
आईजी सिन्हा ने अपने बाल्यकाल के संस्मरण साझा करते हुए बताया कि उनका पालन-पोषण भी एक प्रधानाध्यापक के सान्निध्य में हुआ। उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को केवल विषय का ज्ञान नहीं देते, बल्कि जीवन जीने की दिशा भी दिखाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन, समर्पण और निरंतरता को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
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नन्हे कदमों ने दिया बड़ा संदेश
समारोह की शुरुआत ही बेहद मनमोहक रही। एलकेजी से कक्षा चार तक के नन्हे-मुन्ने बच्चे देश के विभिन्न राज्यों की सतरंगी पारंपरिक वेशभूषा में सजे नजर आए। बच्चों ने अतिथियों का स्वागत हरित पौधे भेंट कर किया। उनकी यह पहल ‘विविधता में एकता’ के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे गई। इसके बाद विद्यालय के संगीत दल ने स्वागत गान प्रस्तुत किया। छात्राओं की भावपूर्ण ‘गुरु वंदना’ ने पूरे सभागार को श्रद्धा और सम्मान के भाव से भर दिया। मंच पर मौजूद अतिथियों से लेकर दर्शक दीर्घा तक, हर ओर गुरुओं के प्रति सम्मान की अनुभूति स्पष्ट दिखाई दी।
जब तकनीक और कला ने बयां किया गुरु का समर्पण
कार्यक्रम में तकनीक और कला का अनूठा संगम भी देखने को मिला। कक्षा 12 के मेधावी छात्र प्रद्युम्न सिन्हा ने शिक्षकों के त्याग, समर्पण और प्रेरक भूमिका पर आधारित दो मिनट की स्टॉप-मोशन एनीमेशन फिल्म तैयार की। फिल्म की रचनात्मकता और भावनात्मक प्रस्तुति ने खूब सराहना बटोरी।
इसके बाद छात्र-छात्राओं ने शास्त्रीय समूह कथक नृत्य प्रस्तुत किया। ताल, लय और भावों से सजी इस प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और समारोह की सांस्कृतिक गरिमा को और ऊंचाई प्रदान की।
65 नामों की घोषणा के साथ गूंजती रहीं तालियां

समारोह का सबसे गौरवपूर्ण क्षण तब आया, जब 65 चयनित श्रेष्ठ शिक्षकों के नामों की घोषणा की गई। एक-एक नाम के साथ पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठता। यह सिर्फ पुरस्कार वितरण नहीं था, बल्कि वर्षों से शिक्षा के प्रति समर्पित उन शिक्षकों के योगदान को सार्वजनिक सम्मान देने का क्षण था, जिनकी मेहनत से असंख्य विद्यार्थियों के सपनों को दिशा मिलती है।
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मुख्य अतिथि आईजी शैलेन्द्र कुमार सिन्हा, डॉ. राधाकृष्णन सहोदया स्कूल्स कॉम्प्लेक्स, बोकारो के अध्यक्ष सह DPS (दिल्ली पब्लिक स्कूल) बोकारो के प्राचार्य डॉ. अवनींद्र सिंह गंगवार, मेजबान पिट्स मॉडर्न स्कूल के प्राचार्य बृज मोहन लाल दास सहित अन्य अतिथियों ने सभी सम्मानित शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र और मेडल प्रदान किए।
सम्मान प्राप्त करने के बाद पिट्स मॉडर्न स्कूल की सेकेंडरी कोऑर्डिनेटर नीलांजना दासगुप्ता ने सभी अतिथियों और आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया। समारोह में ओरिका (आईईपीएल) गोमिया के एमसीएम अभिषेक बिस्वास, गोमिया स्कूल सोसाइटी के उपाध्यक्ष अरिंदम दासगुप्ता, सहोदया के महासचिव बीएम लाल दास, दीपक जोशी, डॉ. संजय कुमार चौधरी सहित बोकारो के 21 विद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षाविद और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रत्युष कुमार झा और उज्जयिनी भट्टाचार्य ने किया। अंत में करिश्मा बिष्ट के धन्यवाद ज्ञापन के बाद राष्ट्रगान की गूंज के साथ गुरु वशिष्ठ पुरस्कार समारोह 2026 का भव्य समापन हुआ।
