एक दिन की हड़ताल, ₹200 करोड़ का नुकसान, बोकारो के बैंकों में लटके रहे ताले, जानिए क्यों

Mithila Varnan

बैंककर्मियों ने मांगों को ले भरी हुंकार, अब 26 से अनिश्चितकालीन तालाबंदी की चेतावनी

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VARNAN DIGITAL DESK

बोकारो: केंद्र सरकार की कथित हठधर्मिता के खिलाफ और कर्मचारियों के हक की आवाज बुलंद करने के लिए शुक्रवार को पूरा बोकारो जिला पूरी तरह ठप हो गया। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) के आह्वान पर आयोजित 11 सितंबर की एकदिवसीय देशव्यापी हड़ताल के कारण बोकारो जिले की सभी बैंक शाखाओं और कार्यालयों में शत-प्रतिशत तालाबंदी रही। इस हड़ताल का असर इतना व्यापक रहा कि महज एक ही दिन में जिले भर में अनुमानित 200 करोड़ रुपये से अधिक का बैंकिंग एवं वित्तीय कारोबार पूरी तरह ध्वस्त हो गया। चेक क्लीयरेंस, कैश डिपॉजिट, ड्राफ्ट और ऋण स्वीकृति से जुड़े तमाम कार्य पूरी तरह ठप रहने से आम जनता और व्यापारियों को भारी किल्लत का सामना करना पड़ा।

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मूसलाधार बारिश में भी डटे रहे आंदोलनकारी

हड़ताल की धमक सुबह से ही सड़कों पर दिखने लगी थी। चास, बोकारो और आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों की संख्या में जुटे बैंक कर्मचारियों एवं स्केल-3 तक के अधिकारियों का जोश और जज्बा देखते ही बन रहा था। सेक्टर-4 स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा से निकाली गई एक विशाल रैली मूसलाधार बारिश में भी भीगते हुए पूरे सिटी सेंटर का भ्रमण करती रही। महिला कर्मचारियों और अधिकारियों की अभूतपूर्व उपस्थिति के साथ यह रैली भारतीय स्टेट बैंक (SBI) सेक्टर-4 के समक्ष पहुंचकर एक विशाल आक्रोश सभा में बदल गई, जहां गगनभेदी नारों से पूरा परिसर गूंज उठा।

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इंसेंटिव में दोहरे मापदंड और 5-डे बैंकिंग को लेकर बढ़ा विवाद

इस आक्रोश की मुख्य वजह पीएलआई (परफॉर्मेंस लिंक्ड इन्सेंटिव) में दोहरा मापदंड और 5-डे बैंकिंग को लेकर सरकार की वादाखिलाफी है। इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) और यूनियनों के बीच तय समझौते को धता बताते हुए वित्तीय सेवा निदेशालय (DFS) ने अचानक नया फरमान जारी कर दिया। इसमें 93 प्रतिशत कर्मचारियों और स्केल-3 तक के अधिकारियों को महज 15 दिन का इंसेंटिव देने का निर्देश दिया गया, जबकि उससे ऊपर के अधिकारियों को 365 दिन का इंसेंटिव थमा दिया गया। इसके अलावा, वर्ष 2024 में ही IBA और यूनियनों के बीच 5-डे बैंकिंग लागू करने पर लिखित सहमति बन चुकी थी और यूनियनें इसके बदले प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त काम करने को भी तैयार हैं। इसके बावजूद केंद्र सरकार इसे ठंडे बस्ते में डाले हुए है, जबकि रिजर्व बैंक और ब्रिक्स के अन्य देशों में भी 5-डे बैंकिंग ही लागू है।

वार्ता विफल रहने पर 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल का अल्टीमेटम

केंद्रीय श्रमायुक्त के समक्ष हुई वार्ता के बेनतीजा रहने पर बैंक नेताओं ने सरकार को स्पष्ट अल्टीमेटम थमा दिया है। सिद्धेश नारायण दास, राघव कुमार सिंह, राजीव कुमार सिंह, कृष्ण मुरारी, मिथलेश कुमार, सुधीर कुमार, सुबोध रजक, राजेश ओझा, विभाष झा, पंकज कुमार, प्रदीप झा, राकेश मिश्रा, अवधेश प्रसाद, नीरज तिवारी, राजेश श्रीवास्तव और उर्मिला कुमारी सहित अन्य यूनियन अगुआओं ने दो टूक कहा कि यदि सरकार ने इस भेदभावपूर्ण निर्देश को वापस नहीं लिया और 5-दिवसीय कार्यदिवस समेत नई बहालियों के मुद्दों को हल नहीं किया, तो 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जाएगी। इसके बाद भी बात न बनने पर 26 अक्टूबर से देश भर के सभी बैंक अनिश्चितकालीन बंद पर चले जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी भारत सरकार की होगी।




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