‘स्वच्छ पत्रकारिता, स्वस्थ पत्रकारिता’, यही है हमारा लक्ष्य। इसी उद्देश्य को लेकर वर्ष 1985 में मिथिलांचल के गर्भ-गृह जगतजननी माँ जानकी की जन्मभूमि सीतामढ़ी की कोख से निकला था आपका यह लोकप्रिय हिन्दी साप्ताहिक ‘मिथिला वर्णन’। उन दिनों अखण्ड बिहार में इस अख़बार ने साप्ताहिक के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनायी। कालान्तर में बिहार का विभाजन हुआ। रत्नगर्भा धरती झारखण्ड को अलग पहचान मिली। पर ‘मिथिला वर्णन’ न सिर्फ मिथिला और बिहार का, बल्कि झारखंड का भी प्रतिनिधित्व करता रहा।
समय बदला, परिस्थितियां बदलीं। अन्तर सिर्फ यह हुआ कि हमारा मुख्यालय बदल गया, लेकिन एशिया महादेश में सबसे बड़े इस्पात कारखाने को अपनी गोद में समेटे झारखण्ड की धरती बोकारो इस्पात नगर से प्रकाशित यह साप्ताहिक शहर और गाँव के लोगों की आवाज बनकर आज भी ‘स्वच्छ और स्वस्थ पत्रकारिता’ के क्षेत्र में निरन्तर गतिशील है।
तकनीकी और डिजिटल संचार क्रांति के इस युग में भी आज यह समाचार-पत्र कदम से कदम मिलाकर आगे गतिशील है। आज यह अख़बार डिजिटल मीडिया के रूप में न्यूज पोर्टल सहित तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी उपलब्ध है। हमें उम्मीद है कि अपने सुधी पाठकों और शुभेच्छुओं के सहयोग से यह अखबार आगे और भी प्रगतिशील होता रहेगा। एक बार हम अपने सहयोगियों के प्रति पुनः आभार प्रकट करते हैं, जिन्होंने हमें इस मुकाम तक पहुँचाने में अपना विशेष योगदान दिया है।
धन्यवाद!
