मैदान से लेकर पहाड़ तक जनजीवन तबाह
ब्यूरो संवाददाता
नई दिल्ली : देश के एक बड़े भूभाग में मानसून के अति-सक्रिय और उग्र रूप धारण कर लेने से चारों तरफ तबाही का खौफनाक मंजर देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश से लेकर बिहार, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर तक नदियां विकराल रूप धारण कर चुकी हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस साल अगस्त महीने की औसत बारिश का पिछला सारा रिकॉर्ड टूट चुका है। सड़कों पर कई फीट पानी भरने से न केवल ट्रैफिक व्यवस्था ठप हो गई है, बल्कि जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है।
मौसम विभाग ने दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अगले कुछ दिनों के लिए अत्यधिक मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया है। दूसरी ओर, राजस्थान के पूर्वी इलाकों में झमाझम बारिश के बाद हालांकि मानसून की रफ्तार में हल्की कमी के संकेत हैं, लेकिन अत्यधिक जलभराव और उमस ने लोगों की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। मध्य प्रदेश में एक साथ तीन मानसूनी सिस्टम एक्टिव होने के कारण नर्मदा और उसकी सहायक नदियां उफान पर हैं, जिससे निचले इलाकों में पानी भर गया है।

उत्तर प्रदेश के 13 जिलों में बाढ़ से हाहाकार
उत्तर प्रदेश में कुदरत का सबसे भयावह रूप देखने को मिल रहा है, जहां गंगा, घाघरा, यमुना, रामगंगा और मंदाकिनी सहित 6 प्रमुख नदियां खतरे के निशान के काफी ऊपर बह रही हैं। राज्य के 13 से अधिक जिलों में 84 हजार से ज्यादा आबादी बाढ़ की सीधी चपेट में है। सबसे डरावना और हृदयविदारक दृश्य धार्मिक नगरी वाराणसी में सामने आया है, जहां गंगा के रौद्र रूप के कारण सभी 84 ऐतिहासिक घाट पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं।
मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर शवदाह के लिए एक इंच जमीन भी सूखी नहीं बची है, जिसके चलते परिजनों को पास की छतों और गलियों में अंतिम संस्कार करने को मजबूर होना पड़ रहा है। बदायूं जिले में गंगा नदी के भीषण कटान से कदम नगला बरयपुरा सहित कई गांवों के दर्जनों पक्के मकान देखते ही देखते नदी की तेज धारा में समा चुके हैं, जबकि सैकड़ों बीघा उपजाऊ कृषि जमीन पानी में डूब गई है। हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र में भुंडी घाट के पास गंगा का जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि मुख्य तटबंधों पर महज दो दिनों में 100 मीटर से ज्यादा कटान हो चुका है। यदि यह तटबंध टूटता है तो दर्जनों गांव पूरी तरह जलमग्न हो जाएंगे। प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 5 अलर्ट चौकियां बनाकर एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को रेस्क्यू आपरेशन में उतार दिया है।
