दूसरों के ‘आधार’ और फिंगरप्रिंट का गलत इस्तेमाल कर एक्टिव करते थे सिम; SIT ने फर्जीवाड़े के धंधे का किया पर्दाफाश
VARNAN DIGITAL DESK
BOKARO : साइबर अपराधियों के अंतर्राष्ट्रीय और अंतरराज्यीय जाल को काटने के लिए बोकारो पुलिस ने एक और बड़ा तथा धमाकेदार प्रहार किया है। फर्जी सिम कार्ड के जरिए आम लोगों की गाढ़ी कमाई उड़ाने वाले साइबर ठगों को ‘हथियार’ यानी फर्जी सिम मुहैया कराने वाले दो बड़े पॉस एजेंटों को पुलिस ने धर दबोचा है। इन जालसाजों ने महज 800-800 रुपये के लालच में दूसरों के आधार कार्ड और बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट का दुरुपयोग करके 180 से भी ज्यादा एक्टिवेटेड सिम कार्ड साइबर अपराधियों को सौंप दिए थे। चास के सहायक पुलिस अधीक्षक (एएसपी) वेदांत शंकर ने बुधवार को अपने कार्यालय में इस पूरे गोरखधंधे का खुलासा मीडिया के सामने किया। जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार साइबर थाना कांड संख्या-39/2026 के तहत यह बड़ी सफलता हाथ लगी है।

इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब 29 सितंबर 2026 को वरीय पुलिस अधिकारियों को गुप्त सूचना मिली कि दूरसंचार विभाग के कड़े निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए अवैध तरीके से बड़े पैमाने पर सिम निर्गत किए जा रहे हैं। जांच में सामने आया कि पॉस एजेंट प्रदीप दास ने अकेले जुलाई से अगस्त के बीच 140 से अधिक और पॉस एजेंट मुकेश गोप ने 42 फर्जी सिम साइबर अपराधियों के हवाले किए थे। सूचना मिलते ही वरीय अधिकारियों के निर्देश पर बरमसिया ओ०पी० प्रभारी शैलेन्द्र कुमार और चंदनकियारी थाना प्रभारी अमित कुमार राय के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया, जिसने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया।
पुलिस की कड़ी पूछताछ में दोनों पॉस एजेंटों ने अपना जुर्म कबूल करते हुए चौकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि चंद पैसों के लालच में आकर वे दुकान पर आने वाले निर्दोष लोगों के आधार कार्ड और फिंगरप्रिंट का उपयोग कर अतिरिक्त सिम चालू कर लेते थे। इसके बाद इन अवैध सिम कार्डों को बोकारो के सियालजोरी थाना क्षेत्र के साबड़ा निवासी पमित माहथा, देवघर निवासी राहुल कुमार और पश्चिम बंगाल के संथालडीह निवासी विवेक चौधरी जैसे जालसाजों को 800 रुपये प्रति सिम के हिसाब से बेच देते थे। इतना ही नहीं, इन फर्जी सिमों से होने वाली वित्तीय धोखाधड़ी और ठगी के पैसों में से भी पॉस एजेंटों को बाकायदा हिस्सा मिलता था।
एएसपी के मुताबिक, गिरफ्तार अभियुक्तों में 27 वर्षीय प्रदीप दास (पिता- पांडव दास, निवासी- बोरियाडीह दास टोला, थाना- चंदनकियारी, बोकारो) तथा 20 वर्षीय मुकेश गोप (पिता- नितीश गोप, निवासी- गमहरिया, थाना- चंदनकियारी, बोकारो) शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों के पास से एक सैमसंग गैलेक्सी A17 5G मोबाइल (दो एयरटेल सिम के साथ) तथा एक रियलमी 12X 5G मोबाइल (मॉडल नंबर- A059, सिरियल नंबर- 00613547002539, काला रंग, एयरटेल और जियो के दो सिम के साथ) जब्त किया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बोकारो साइबर थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संगीन धाराओं 319(2), 318(4), 338, 336(3), 111 के साथ-साथ आई०टी० एक्ट की धारा 66(C)/66(D) एवं टेलीकॉम एक्ट की धारा 42(3)(e) के तहत मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। साइबर सिंडिकेट को ध्वस्त करने वाली इस विशेष टीम में बरमसिया ओ०पी० प्रभारी पु०अ०नि० शैलेन्द्र कुमार, चंदनकियारी थाना प्रभारी पु०अ०नि० अमित कुमार राय, आरक्षी-302 मनोज कुमार मिश्रा तथा आरक्षी-172 सचिन बेसरा शामिल थे। बोकारो पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत एक तरफ ठगी करने वालों को दबोचा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ फर्जी सिम उपलब्ध कराने वाले एजेंटों पर भी टेलीकॉम एक्ट के तहत नकेल कसी जा रही है।
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