दिल्ली में मैराथन NJCS बैठक के बाद प्रबंधन ने जताई सहमति
VARNAN DIGITAL DESK
BOKARO : देश की महारत्न इस्पात कंपनी ‘स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड’ (SAIL) और बोकारो स्टील प्लांट (BSL) के हजारों कामगारों के लिए इस बार की दुर्गा पूजा बेहद खास, भव्य और खुशियों से सराबोर होने जा रही है। बोनस की सटीक और अंतिम राशि को लेकर पिछले काफी समय से चली आ रही सांसें थाम देने वाली प्रतीक्षा आखिरकार गुरुवार को पूरी तरह समाप्त हो गई। नई दिल्ली में आयोजित नेशनल ज्वाइंट कमेटी फॉर स्टील (NJCS) और सेल प्रबंधन की उच्चस्तरीय बैठक में घंटों चले मैराथन मंथन के बाद कर्मचारियों के बोनस पर अंतिम और ऐतिहासिक मुहर लग गई है। मां दुर्गा की आराधना और त्योहारी खरीदारी से ठीक पहले मिलने वाली इस भारी-भरकम राशि के आधिकारिक ऐलान से कामगारों और उनके परिवारों के चेहरों पर जो मुस्कान बिखरी है, उसने पूरे इस्पातनगरी बोकारो के बाजारों में भी अभी से एक अभूतपूर्व उत्साह और आर्थिक बहार ला दी है।
नियमित को ₹32,000 और ट्रेनी को मिलेंगे ₹25,600
नई दिल्ली में गुरुवार दोपहर करीब 2:30 बजे शुरू हुई इस अति-महत्वपूर्ण बैठक में सेल प्रबंधन और विभिन्न केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के दिग्गजों के बीच तीखी बहस, तर्कों और लंबे विचार-विमर्श का दौर चला। बैठक की शुरुआत में प्रबंधन की ओर से पुराने और निर्धारित फार्मूले के आधार पर नियमित कर्मचारियों के लिए 31,200 रुपये और प्रशिक्षु यानी ट्रेनी कर्मचारियों के लिए 24,960 रुपये बोनस देने का शुरुआती प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि, यूनियन प्रतिनिधियों के कड़े रुख, जोरदार पैरवी और गहन चर्चा के बाद प्रबंधन ने बड़ा दिल दिखाते हुए राशि में बढ़ोतरी का निर्णय लिया। इसके तहत अब नियमित कर्मचारियों को 32,000 रुपये और प्रशिक्षु कर्मियों को 25,600 रुपये का बंपर बोनस दिया जाएगा। प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि बोनस की यह पूरी राशि दुर्गा पूजा के पावन पर्व से ठीक पहले कर्मचारियों के बैंक खातों में सुरक्षित ट्रांसफर कर दी जाएगी।
बैठक में ये रहे मौजूद
इस उच्चस्तरीय और निर्णायक बैठक में सेल प्रबंधन की ओर से निदेशक (कार्मिक) के.के. सिंह, निदेशक (वाणिज्य) टी.एन. नटराजन, मुख्य महाप्रबंधक (एचआर) संजीव कुमार गुप्ता, मुख्य महाप्रबंधक (एफएंडए) पवन कुमार अग्रवाल और महाप्रबंधक मलय गोस्वामी पूरी सक्रियता के साथ मौजूद रहे। वहीं एनजेसीएस की ओर से इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जी. संजीवा रेड्डी व बी.एन. चौबे, बीएमएस से श्रीनिवास राव व रंजय कुमार, सीटू से ललित मोहन मिश्र व डी.वी.एस. रेड्डी, एचएमएस से संजय वढावकर व राजेंद्र सिंह, एआईटीयूसी से विद्यासागर गिरि तथा बीएसएल से रामाश्रय प्रसाद सिंह जैसे दिग्गज श्रमिक नेताओं ने कामगारों के हितों की पुरजोर पैरवी की।
छह साल में लगभग दोगुना हो गया बोनस
सेल कर्मचारियों के पिछले वर्षों के बोनस आंकड़ों पर यदि नजर डाली जाए, तो इस बार की राशि अब तक के इतिहास में सबसे बड़ी साबित हो रही है। पिछले वर्षों के वित्तीय सफर को देखें तो विगत पिछले लगभग छह दशक में बोनस की रकम बढ़कर लगभग दोगुनी हो गई। वर्ष 2020-21 में 16,500 रुपये, वर्ष 2021-22 में 21,000 रुपये, वर्ष 2022-23 में 28,000 रुपये, वर्ष 2023-24 में 23,000 रुपये, वर्ष 2024-25 में 26,500 रुपये, वर्ष 2025-26 में 29,500 रुपये और अब वर्ष 2026-27 के लिए रिकॉर्ड 32,000 रुपये का बोनस तय किया गया है, जो कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत है।
बोकारो-चास के बाजार होंगे गुलजार
अनुमान है कि 25 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बोनस के रूप में सीधे बोकारो और चास के बाजारों में बहेगी। इससे कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, सर्राफा, घरेलू सामान और पूजा-सामग्री के हर छोटे-बड़े सेक्टर में रिकॉर्ड तोड़ बिक्री होने की पूरी संभावना है। अब कर्मचारियों के साथ-साथ बोकारो और चास के तमाम छोटे-बड़े व्यापारी भी इस धनवर्षा के अपने-अपने खातों में उतरने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
इधर, BAKS ने किया विरोध, कहा- गैरनिर्वाचित नेताओं के द्वारा हुआ अवैध बोनस समझौता
पूछा सवाल- कौन सी विवशता थी, जो मान गए मामूली रकम?
दूसरी तरफ बोनस को लेकर असंतोष का माहौल भी देखा जा रहा है। बीएकेएस (बोकारो अनाधिशासी कर्मचारी संघ) के महासचिव हरिओम ने देरशाम प्रेस को जारी अपने आधिकारिक बयान में बोनस समझौते का विरोध किया। कहा कि सबसे पहला प्रश्न तो हस्ताक्षर करने वाले वीरों के वीर महावीर नेताओं से की ऐसी कौन सी मजबूरी आन पड़ी थी कि उन्हें 32000 रुपए की मामूली-सी राशि को बोनस के रूप में स्वीकार करना पड़ा। जब BAKS के जैसी संगठन जमीन पर उतरकर पुरजोर संघर्ष कर रही है तथा बोनस फार्मूले में बिना बदलाव किया बोनस देने की स्थिति में चरणबद्ध आंदोलन के घोषणा कर रखी है तथा कर भी रही है वैसे में ऐसी कौन सी विवशता थी जिस विवशता में आकर के आप लोगों ने इस समझौते को स्वीकार किया? यह आज सेल का प्रत्येक कर्मचारी पूछ रहा है।
समझौते को स्वीकार करने वाले वैसे सभी नेता जिन्हें बर्नपुर में मुश्किल से एक परसेंट वोट भी प्राप्त नहीं हुए फिर भी उन्होंने हस्ताक्षर करने की हिम्मत की। यह तो समझ आता है, जिनकी जमीन पर कोई पूछने वाला नहीं वो तो कुछ भी कर सकता है। उनके कृत्यों की जितनी निंदा की जाए वह कम है।
निकालेंगे मौन जुलूस
हरिओम ने कहा – इस अवैध बोनस समझौता का हम पूर्ण विरोध करते हैं तथाअपने यूनियन द्वारा पूर्व निर्धारित काला झंडा के साथदिनांक 06/10/26 को मौन जुलूस तथा उसके बाद आमरण अनशन के लिए अपने साथियों से पूरी तैयारी का आह्वान करते हैं।
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