गीता ज्ञान-यज्ञ के दूसरे दिन 1500 विद्यार्थियों को मिला सफलता का महामंत्र; IG शैलेंद्र सिन्हा भी महाआरती में हुए शामिल
VARNAN DIGITAL DESK
BOKARO : “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती ताकत देखकर घबराने की जरूरत नहीं है! याद रखिए, एआई के पीछे इंसानी दिमाग (Human Intelligence) काम करता है और उस इंसानी दिमाग के पीछे ईश्वर की दैवीय मेधा (Divine Intelligence) की शक्ति होती है!” — दुनिया भर में Artificial Intelligence के बढ़ते दबदबे और उससे उपजे भ्रम के दौर में यह कालजयी संदेश दिया अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आध्यात्मिक गुरु स्वामी तेजोमयानंद सरस्वती महाराज ने।
चिन्मय मिशन बोकारो की ओर से चिन्मय विद्यालय परिसर में आयोजित तीन दिवसीय ‘गीता-पंचामृत ज्ञान यज्ञ’ के दूसरे दिन मंगलवार को कुछ ऐसा ही अद्भुत और विहंगम नजारा देखने को मिला। कथा-स्थल पर बोकारो शहर और आसपास के सुदूर क्षेत्रों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
स्वर्ण जयंती वर्ष में प्रवेश कर रहे चिन्मय विद्यालय बोकारो के भव्य ऑडिटोरियम में आयोजित विशेष छात्र सभा में जब 1500 से अधिक छात्र-छात्राएं स्वामी तेजोमयानंद जी के सामने बैठे, तो माहौल में एक अलग ही ऊर्जा तैरने लगी।

डिजिटल दौर की चुनौतियों पर गंभीर चिंतन साझा करते हुए स्वामी जी ने कहा कि आधुनिक तकनीक और स्मार्टफोन के अति-उपयोग से आज सूचनाओं का भयानक विस्फोट तो हो गया है, लेकिन युवाओं की मौलिक सोचने-समझने और तार्किक क्षमता कमजोर पड़ रही है। इसी का नतीजा है कि आज का इंसान तनाव, अवसाद और अनिर्णय का शिकार हो रहा है। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि एआई के इस दौर में भी केवल मनुष्य का जागृत विवेक ही उसे जीवन की असली परीक्षा में विजयी बना सकता है और यह विवेक केवल ईश्वर-चिंतन व सत्संग से ही हासिल होता है।
‘मनुष्य का अधिकार केवल कर्म पर, फल पर नहीं’
सांस्कृतिक व सायंकालीन सत्र में स्वामी तेजोमयानंद महाराज ने श्रीमद्भगवद्गीता के दूसरे और नौवें अध्याय के कालजयी श्लोकों की व्यावहारिक व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने श्रद्धालुओं से सीधे संवाद करते हुए कहा कि मनुष्य का अधिकार केवल अपने हिस्से का कर्म करने पर है, उसके नतीजे (फल) पर नहीं।
उन्होंने बेहद रोचक अंदाज में समझाया कि फल हमेशा भविष्य के गर्भ में छिपा होता है और अनिश्चित रहता है, इसलिए फल की व्यर्थ चिंता करने से मन चंचल हो जाता है और काम करने की क्षमता आधी रह जाती है। स्वामी जी ने सफलता का व्यावहारिक सूत्र देते हुए कहा कि जब आपके हाथ काम कर रहे हों, तो मन को भी ठीक वहीं टिका दें। निष्काम और समर्पण भाव से किया गया कर्म ही मनुष्य को तनाव, चिंता और स्वार्थ के बंधनों से मुक्त कर असीम शांति प्रदान करता है।

IG शैलेंद्र सिन्हा ने उतारी महाआरती, 38 मेधावी छात्र ट्रॉफी से सम्मानित
संध्या सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तरी छोटानागपुर प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (IG) शैलेंद्र कुमार सिन्हा उपस्थित हुए। उन्होंने पूज्य स्वामी जी के साथ दीप प्रज्वलित कर श्रीमद्भगवद्गीता की भव्य महाआरती उतारी।
इस पावन अवसर पर स्वामी तेजोमयानंद महाराज के पावन कर-कमलों से हाल ही में आयोजित जिला स्तरीय ‘चिन्मय मिशन गीता पाठ प्रतियोगिता’ के 38 सफल प्रतिभागियों एवं विजेताओं को ट्रोफी तथा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। स्वामी जी ने बच्चों को दुलारते हुए कहा कि बचपन में ही गीता का पाठ करने से बच्चों में तीक्ष्ण बुद्धि, अटूट एकाग्रता और मन पर अद्भुत नियंत्रण पैदा होता है।
समारोह में चिन्मय मिशन रांची के प्रमुख परिपूर्णानंद सरस्वती, चिन्मय मिशन गोवा के प्रमुख सुघोषानंद सरस्वती, चिन्मय मिशन बोकारो की आचार्या स्वामिनी संयुक्तानंदा सरस्वती, अध्यक्ष बिस्वरूप मुखोपाध्याय, उपाध्यक्ष महेश त्रिपाठी, सचिव हरिहर राउत, प्रभारी प्राचार्य नरमेंद्र कुमार, उप प्राचार्य डॉ. रोशन शर्मा, चिन्मय विद्यालय जमशेदपुर की प्रबंध समिति के सदस्य और हजारों की संख्या में शहर के प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।
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