झारखंड का नाम देश में रोशन, DPS बोकारो के हेडमास्टर गोपाल और शिक्षक रोहित को मिला ‘राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान 2026’

Mithila Varnan

पूरे राज्य से केवल दो शिक्षकों का हुआ चयन; शिक्षा में नवाचार व समर्पण को मिली राष्ट्रीय पहचान, प्राचार्य डॉ. गंगवार ने किया सम्मानित

VARNAN DIGITAL DESK

Bokaro : झारखंड की शैक्षणिक प्रतिभा ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) बोकारो के हेडमास्टर गोपाल नारायण विश्वकर्मा और फ्रेंच भाषा के शिक्षक रोहित रंजन को उनके अद्वितीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘भारत नेशनल टीचर अवार्ड 2026’ से अलंकृत किया गया है। ग्रेटर नोएडा स्थित आईआईएलएम यूनिवर्सिटी परिसर में आयोजित भव्य ‘भारत एजुकेशन कॉन्क्लेव एंड नेशनल अवार्ड्स 2026’ के मंच पर जब इन दोनों शिक्षकों का नाम गूंजा, तो पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। पूरे झारखंड राज्य से केवल डीपीएस बोकारो के इन दो शिक्षकों का चयन होना इस उपलब्धि को और भी खास और ऐतिहासिक बनाता है।

दिग्गज शिक्षाविदों की उपस्थिति में पाया सम्मान

यह गरिमापूर्ण आयोजन भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) तथा नीति आयोग से संबद्ध प्रतिष्ठित ‘सेंटर फॉर एजुकेशनल डेवलपमेंट’ (CED Foundation) द्वारा आयोजित किया गया था। सम्मान समारोह के दौरान देश-विदेश के कई शीर्ष शिक्षाविद और नीतिकार मौजूद रहे। केआर मंगलम यूनिवर्सिटी के चांसलर प्रो. दिनेश सिंह, जॉन लोहर (कार्यकारी निदेशक – यूजी प्रोग्राम्स एवं ग्लोबल पार्टनरशिप), बी. डी. वाधवा (प्रो चांसलर एमेरिटस) और सीईडी फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. प्रियदर्शी नायक जैसे मूर्धन्य विद्वानों के हाथों सम्मान पाकर दोनों शिक्षकों ने न केवल अपना, बल्कि पूरे राज्य का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।

नवाचार और कड़े मूल्यांकन की कसौटी पर कसकर मिली सफलता

राष्ट्रीय स्तर पर यह मुकाम हासिल करना आसान नहीं था। इसके लिए आयोजकों ने एक बेहद सूक्ष्म और कठोर मूल्यांकन प्रक्रिया अपनाई थी। कक्षा के भीतर शिक्षण में नए-नए प्रयोग (Innovation), आधुनिक तकनीकों का कुशल उपयोग, प्रभावी नेतृत्व क्षमता और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रति अटूट निष्ठा—इन सभी पैमानों पर दोनों शिक्षकों ने खुद को खरा साबित किया। नैतिक मूल्यों के साथ आधुनिक शिक्षा को जोड़ने की उनकी अनूठी कला को परखने के बाद ही उन्हें इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान के लिए चुना गया।

अनुभव और समर्पण की बनाई मिसाल

सफलता के इस शिखर तक पहुंचने के पीछे दोनों शिक्षकों की सालों की अथक मेहनत और शिक्षा के प्रति समर्पण छुपा है। गणित के गूढ़ सिद्धांतों को अपनी अनोखी शैली से सहज बनाने वाले हेडमास्टर गोपाल नारायण विश्वकर्मा विगत 25 वर्षों से शिक्षा जगत की सेवा में निरंतर समर्पित हैं। वहीं, फ्रेंच भाषा के बहुआयामी शिक्षक रोहित रंजन पिछले 12 वर्षों से अपनी आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से विद्यार्थियों के क्षितिज को विस्तार दे रहे हैं। दोनों ही गुरुओं के पास अनुभव का वह खजाना है, जो आज के आधुनिक युग में छात्रों का सही मार्गदर्शन कर रहा है।

बोकारो लौटने पर जश्न का माहौल, प्राचार्य ने बढ़ाया उत्साह

राष्ट्रीय सम्मान से नवाजे जाने के बाद शुक्रवार को जब दोनों शिक्षक बोकारो लौटे, तो विद्यालय परिवार में उत्सव जैसा माहौल नजर आया। डीपीएस बोकारो के प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार ने खुद उनका आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने सांकेतिक रूप से दोनों गुरुओं को सम्मान में मिला स्मृति फलक, प्रशस्ति-पत्र भेंट किया और पीला पट्टा पहनाकर उनकी इस उपलब्धि को सराहा। प्राचार्य की इस सराहना ने दोनों शिक्षकों के चेहरों पर मुस्कान और मन में और बेहतर करने का संकल्प भर दिया।

बोले प्राचार्य डॉ. गंगवार- प्रेरणादायी गुरु ही रचते हैं स्वर्णिम भविष्य

शिक्षकों के इस समर्पण पर गर्व व्यक्त करते हुए प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार ने कहा कि अध्यापन केवल एक पेशा नहीं, बल्कि निरंतर कुछ नया सीखने और सिखाने का जज्बा है। उन्होंने कहा कि शिक्षण में नवाचार और समर्पण ही किसी शिक्षक को महान बनाता है। हमारे शिक्षकों को मिला यह राष्ट्रीय सम्मान पूरे बोकारो और झारखंड के शिक्षा जगत के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण है। वहीं, सम्मानित शिक्षकद्वय ने भी इस अभूतपूर्व सफलता का श्रेय विद्यालय के माहौल और प्राचार्य डॉ. गंगवार के कुशल मार्गदर्शन को देते हुए उनके प्रति अपना आभार व्यक्त किया।

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