‘सृजन’ : DPS बोकारो में सजा वैज्ञानिक नवाचार का उत्सव; मानवहित, पर्यावरण-संरक्षण और विश्वशांति से लेकर स्मार्ट सिटी तक की दिखी परिकल्पना

Mithila Varnan

IIT (ISM) और BIT Mesra के दिग्गजों ने भी सराहा, बोलीं प्रो. रजनी- विकसित और आत्मनिर्भर भारत-निर्माण में विद्यालयों की भूमिका सबसे अहम

VARNAN DIGITAL DESK
BOKARO :
विद्यार्थियों की वैज्ञानिक, बौद्धिक और रचनात्मक प्रतिभा को एक नया आसमान देने के उद्देश्य से दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS), बोकारो में आयोजित तीन-दिवसीय प्रतियोगिता ‘सृजन’ का समापन एक भव्य और ऐतिहासिक प्रदर्शनी के साथ हुआ। इस महोत्सव के अंतिम दिन लगभग 150 प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं ने अपनी वैज्ञानिक सोच और कलात्मक हुनर का ऐसा जादू बिखेरा कि देखने वाले दंग रह गए। जूनियर और सीनियर दोनों वर्गों के तहत विज्ञान प्रदर्शनी, बाल अधिकार और रोबोटिक्स के करीब 40 आकर्षक स्टॉल लगाए गए थे, जहां बच्चों ने अपनी अनूठी कल्पनाओं को जीवंत मॉडल का रूप दिया।

इस सृजनात्मक महाकुंभ का विधिवत उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचीं IIT (ISM), धनबाद की अंतरराष्ट्रीय संबंधों की विभागाध्यक्ष प्रो. रजनी सिंह ने किया। उन्होंने एक-एक स्टॉल पर जाकर बाल वैज्ञानिकों के प्रोजेक्ट्स का बारीकी से निरीक्षण किया और उनकी मेहनत को सराहा। प्रो. रजनी सिंह ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि विज्ञान तभी सार्थक है जब वह समाज, मानव और प्रकृति के हित में काम करे। आज जब देश तेजी से विकसित और आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम बढ़ा रहा है, तब विद्यालयों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है, जहां बच्चों के अंदर नवाचारी विचारों का बीजारोपण कर एक स्थायी और बेहतर भविष्य की नींव रखी जाती है।

बाल वैज्ञानिकों ने नायाब प्रोजेक्ट्स से मन मोहा

इस उत्सव में बच्चों ने साबित कर दिया कि उम्र महज एक संख्या है और उनके पास देश की बड़ी समस्याओं का समाधान करने की अचूक क्षमता है। ‘STEM For विकसित एंड आत्मनिर्भर भारत’ थीम पर सजी विज्ञान प्रदर्शनी में बच्चों ने सड़क व नदी सफाई की रोबोटिक तकनीक, बाढ़ आने से पहले पूर्वानुमान लगाने वाले सिस्टम, औद्योगिक सुरक्षा और सड़क हादसों को रोकने वाले स्मार्ट अलर्ट जैसे बेहतरीन प्रोजेक्ट पेश किए।

वहीं, बाल अधिकार प्रतियोगिता के तहत ‘संघर्ष और संकट क्षेत्रों में बच्चे: हर बच्चा शांति का हकदार है’ विषय पर आधारित मॉडलों के जरिए बच्चों ने दुनिया को शांति और बचपन बचाने का कड़ा संदेश दिया। इसके अलावा ऑटोमेशन और रोबोटिक्स के चलंत मॉडलों के साथ-साथ विद्यालय की कंपोजिट स्किल लैब में तैयार कलाकृतियों ने भी सबका दिल जीत लिया।

दिग्गज विशेषज्ञों की टीम ने की बाल कलाकारों की परख

बच्चों की इन अद्भुत और क्रांतिकारी वैज्ञानिक प्रतिभाओं का मूल्यांकन करने के लिए देश के शीर्ष संस्थानों से विशेषज्ञ बतौर निर्णायक मंडल मौजूद रहे। इस पैनल में बीआईटी मेसरा के सहायक प्राध्यापक डॉ. विनय कुमार व डॉ. दिलीप सिंह, आईआईटी (आईएसएम) के सहायक प्राध्यापक डॉ. सुमन साहा व डॉ. तमोघ्ना ओझा के साथ-साथ साइंस फॉर सोसाइटी के राज्य संयोजक राजेंद्र कुमार और जिला संयोजक पी.आर.के. वर्मा शामिल रहे। बता दें कि ‘सृजन’ के इस सफर में विज्ञान प्रदर्शनी से पहले रोमांचक अंतर-सदन क्विज और आईटी प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गई थीं, जिनके परिणामों का इंतजार अब सभी को है।

सृजनशीलता निखारने का समुचित मंच देता है DPS बोकारो : प्राचार्य डॉ. गंगवार

समारोह के समापन पर विद्यालय के प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार ने कहा कि बच्चों में वैज्ञानिक चेतना का विकास करना ही आधुनिक शिक्षा का असली उद्देश्य है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि डीपीएस बोकारो हमेशा से अपने विद्यार्थियों को उनकी नवोन्मेषी सृजनशीलता को निखारने के लिए एक मजबूत मंच प्रदान करता रहा है, और यहाँ के बच्चों ने राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। यह तीन-दिवसीय ‘सृजन’ उत्सव न केवल बच्चों के लिए एक सीख साबित हुआ, बल्कि बोकारो के शैक्षणिक गलियारों में एक नई ऊर्जा और उत्साह भर गया।

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