विस्थापित आंदोलन पर चढ़ा सियासी रंग, BSL के उत्पादन और सप्लाई चेन पर गहराया संकट, प्रबंधन ने देशहित में वार्ता को ले बढ़ाया हाथ

Mithila Varnan

विस्थापितों ने बंद किए गेट 9 व 10; कांग्रेस का खुला समर्थन, झारखंड प्रभारी के. राजू का दिल्ली तक हस्तक्षेप, सीएम हेमंत सोरेन को लिखा पत्र

VARNAN DIGITAL DESK
BOKARO :
देश की औद्योगिक रीढ़ कहे जाने वाले बोकारो इस्पात संयंत्र (BSL) और हक की लड़ाई लड़ रहे स्थानीय विस्थापितों के बीच का टकराव अब केवल स्थानीय गतिरोध नहीं रहा, बल्कि यह गंभीर औद्योगिक संकट और गरमाई राज्यस्तरीय सियासत का अखाड़ा बन चुका है। टू-टैंक गार्डन में जारी आमरण अनशन के छठे दिन विस्थापितों के सब्र का बांध ऐसा टूटा कि उन्होंने संयंत्र की धड़कन कहे जाने वाले स्टील गेट नंबर-9 और दुग्गल गेट नंबर-10 को पूरी तरह जाम कर दिया और अनिश्चितकाल के लिए बंद रखने की चेतावनी दे डाली। गेटों पर भारी वाहनों और ट्रकों के पहिए थम जाने से कच्चे माल की आवक और तैयार फौलाद के देशव्यापी डिस्पैच पर सीधा ब्रेक लग गया है, जिससे पूरे संयंत्र के उत्पादन और राष्ट्रीय आपूर्ति शृंखला चरमराने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इसी बीच, आंदोलन को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का सीधा और खुला समर्थन मिलने से यह संघर्ष अब दिल्ली से लेकर रांची तक राजनीतिक हलकों में गूंजने लगा है।

विस्थापितों का आर-पार का ऐलान- ‘1500 अप्रेंटिस की हो स्थायी बहाली, नहीं तो ठप होगा पूरा प्लांट’

अनशन स्थल पर डटे विस्थापित नौजवान संघर्ष मोर्चा और विस्थापित अप्रेंटिस संघ के तेवर पूरी तरह तल्ख हैं। आंदोलनकारियों की सबसे बड़ी और गैर-सौदा मांग संयंत्र में प्रशिक्षण ले चुके 1500 विस्थापित अप्रेंटिस प्रशिक्षुओं की सीधी व नियमित बहाली करना है। इसके साथ ही चतुर्थ श्रेणी के पदों पर विस्थापितों के लिए पूर्ववत आरक्षण व्यवस्था को बहाल करने और विस्थापितों के लिए एक स्पष्ट व पारदर्शी नियोजन नीति लागू करने की मांग शामिल है।

मोर्चा के अध्यक्ष अरुण कुमार महतो और संघ के सक्रिय नेताओं का कहना है कि जिन परिवारों ने राष्ट्र निर्माण के लिए अपनी उपजाऊ पुश्तैनी जमीनें समर्पित कर दीं, आज उनके बच्चे नौकरी के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। विस्थापितों ने दो-टूक कहा कि उन्हें ठेका आधारित रोजगार का छलावा मंजूर नहीं है, बल्कि नियमित नियोजन चाहिए। उन्होंने खुली चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर अविलंब आधिकारिक निर्णय नहीं हुआ, तो गेट नंबर-3, 4, 5, सीजेड गेट और मनसा सिंह गेट की भी पूर्ण तालाबंदी कर पूरे बोकारो स्टील प्लांट का चक्का जाम कर दिया जाएगा।

‘राष्ट्रीय संपत्ति को क्षति न पहुंचाएं’- BSL प्रबंधन की भावुक अपील और औद्योगिक चिंताएं

दूसरी ओर, गेट 9 और 10 के बंद होने से उत्पन्न अभूतपूर्व संकट को देखते हुए बोकारो स्टील प्रबंधन ने आंदोलनकारियों से तुरंत अवरोध समाप्त कर वार्ता की मेज पर आने की विनम्र अपील जारी की है। प्रबंधन ने आधिकारिक वक्तव्य में रेखांकित किया कि ये दोनों गेट संयंत्र के परिचालन की रीढ़ हैं, जहां से कच्चे माल की सतत आपूर्ति और तैयार इस्पात का डिस्पैच पूरे देश में होता है। लंबे समय तक नाकाबंदी रहने से संयंत्र की ब्लास्ट फर्नेस और रोलिंग मिलों के संचालन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा, जिससे देश का भारी आर्थिक नुकसान होगा।

प्रबंधन ने याद दिलाया कि बोकारो स्टील प्लांट केवल एक औद्योगिक परिसर नहीं, बल्कि राष्ट्र की अमूल्य धरोहर है, जिससे पूरे क्षेत्र के हजारों परिवारों की रोटी-रोजी जुड़ी है। ऐसे में संयंत्र को होने वाला कोई भी नुकसान पूरे समाज और देश का साझा नुकसान होगा। प्रबंधन ने दोहराया कि वह संविदा के आधार पर अप्रेंटिसों के नियोजन को गति देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और सकारात्मक संवाद के माध्यम से समाधान के लिए सदैव तैयार है। विदित हो कि बुधवार को उपायुक्त अजय नाथ झा ने भी निदेशक प्रभारी और आला अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर त्योहारों के मद्देनजर शांति बनाए रखने और प्रबंधन को ससमय सकारात्मक वार्ता करने का निर्देश दिया था, लेकिन आंदोलनकारी अब केवल ठोस नतीजे के इंतजार में अड़े हैं।

इधर, सियासत… कांग्रेस ने खोला मोर्चा, दिल्ली से रांची तक हलचल तेज

इस पूरे जनांदोलन को उस वक्त बड़ा राजनीतिक आधार मिल गया, जब बोकारो की कांग्रेस विधायक श्वेता सिंह के नेतृत्व में चल रहे इस संघर्ष को कांग्रेस पार्टी ने अपना संपूर्ण सांगठनिक समर्थन दे दिया। झारखंड कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को आधिकारिक पत्र जारी कर संगठन को पूरी ताकत से आंदोलन में उतरने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट आदेश दिया है कि प्रदेश के सभी कांग्रेस कोटे के मंत्री, सांसद, विधायक और वरिष्ठ पदाधिकारी तुरंत टू-टैंक गार्डन पहुंचकर अनशनकारियों और विधायक श्वेता सिंह को प्रत्यक्ष समर्थन दें। साथ ही, कांग्रेस सांसदों को नई दिल्ली में केंद्रीय इस्पात मंत्री से तत्काल मुलाकात कर संसद और मंत्रालय के स्तर पर विस्थापित युवाओं के नियोजन का मुद्दा उठाने को कहा गया है।

उधर, कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने भी मामले की नजाकत को देखते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र प्रेषित किया है। उन्होंने अनशन पर बैठे युवाओं और बुजुर्ग महिलाओं की गिरती सेहत पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि बीएसएल प्रबंधन से जवाबदेही तय करवाकर विस्थापितों को उनका वाजिब हक दिलाया जा सके।

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