18 अक्टूबर सुबह 5 बजे से प्रभावी; टू-टैंक पर शांतिपूर्ण धरने की छूट, पर प्लांट के गेट जाम करने पर होगी सीधी कार्रवाई
VARNAN DIGITAL DESK
Bokaro :
नियोजन की मांग को लेकर विस्थापित अप्रेंटिस संघ और विस्थापित संगठनों द्वारा बोकारो इस्पात संयंत्र (BSL) के प्रवेश द्वारों की मुकम्मल नाकेबंदी और उसके चलते 17 अक्टूबर को ब्लास्ट फर्नेस, सिंटर प्लांट व एसएमएस सहित प्रमुख उत्पादन इकाइयों के पूरी तरह ठप पड़ने के बाद अब जिला प्रशासन सख्त रुख में सामने आ गया है। संयंत्र परिसर में कर्मचारियों, अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों और आवश्यक सेवाओं के प्रवेश में लगातार उत्पन्न हो रही बाधा तथा प्रतिदिन करीब ₹30 करोड़ के भारी वित्तीय नुकसान व औद्योगिक सुरक्षा पर मंडराते खतरे को देखते हुए अनुमंडल प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। अनुमंडल दण्डाधिकारी (SDM), चास प्रांजल ढांडा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 (1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए बोकारो इस्पात संयंत्र के मुख्य द्वार के चारों तरफ 200 मीटर के दायरे में तत्काल प्रभाव से निषेधाज्ञा लागू कर दी है। यह सख्त प्रशासनिक आदेश रविवार, 18 अक्टूबर 2026 के पूर्वाह्न 5:00 बजे से अगले आदेश तक अनवरत प्रभावी रहेगा।
जारी निषेधाज्ञा के अनुसार, बीएसएल के मुख्य द्वार के 200 मीटर के दायरे में पांच अथवा पांच से अधिक व्यक्तियों के एक साथ जमा होने, समूह बनाकर घूमने या किसी भी प्रकार की भीड़ लगाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके साथ ही, किसी भी व्यक्ति द्वारा आग्नेयास्त्र (बंदूक, पिस्तौल) अथवा लाठी, डंडा, भाला, गड़ासा, तलवार, तीर-धनुष जैसे पारंपरिक हथियार तथा कुदाल, गैंता जैसे खुदाई के औजार लेकर चलने, भ्रमण करने या प्रदर्शन करने पर सख्त मनाही रहेगी। प्रतिबंधित सीमा के भीतर किसी भी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र के साथ जुलूस, रैली, सभा, धरना या प्रदर्शन पूरी तरह गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया है। 200 मीटर के दायरे में ऐसी किसी भी गतिविधि को अंजाम देने की अनुमति नहीं होगी जिससे औद्योगिक उत्पादन, तकनीकी कार्य या सामान्य सार्वजनिक आवागमन बाधित होने की जरा भी आशंका हो।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधित क्षेत्र में ड्यूटी पर तैनात दण्डाधिकारियों, पुलिस पदाधिकारियों एवं सशस्त्र पुलिस बल के जवानों को छोड़कर किसी भी बाहरी अथवा अवांछित व्यक्ति के प्रवेश पर पूरी तरह रोक रहेगी। प्रतिनियुक्त मजिस्ट्रेटों और पुलिस अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे इस निषेधाज्ञा का अक्षरशः कड़ाई से अनुपालन कराएं और संयंत्र के मुख्य द्वार पर कर्मियों व वाहनों का निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने के लिए विधिसम्मत सख्त कार्रवाई अमल में लाएं।
लोकतांत्रिक अधिकार का सम्मान, लेकिन औद्योगिक शांति और सुरक्षा सर्वोपरि’: SDM चास
चास अनुमंडल पदाधिकारी प्रांजल ढांडा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रशासन लोकतांत्रिक व्यवस्था और नागरिकों के शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने के अधिकार का पूरा सम्मान करता है। प्रशासन को टू-टैंक गार्डन के समीप शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से जारी विरोध-प्रदर्शन पर कोई आपत्ति नहीं है और आंदोलनकारी वहां अपनी लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति जारी रख सकते हैं।
18-18 घंटे बंधक बनाना, उत्पादन ठप करना स्वीकार्य नहीं
उन्होंने कड़े शब्दों में चेताया कि संयंत्र के सभी द्वारों को जाम कर कर्मचारियों को 18-18 घंटे तक भीतर बंधक बनाना, उत्पादन ठप करना और संवेदनशील गैस प्रणालियों की सुरक्षा को खतरे में डालना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। आवश्यक औद्योगिक सेवाओं, एंबुलेंस, शिफ्ट बदलने वाले तकनीकी कर्मियों के आवागमन की निरंतरता बनाए रखना और राष्ट्रीय संपत्ति की रक्षा करना जनहित में सर्वोपरि है। अनुमंडल प्रशासन ने सभी आंदोलनकारी संगठनों, विस्थापित नेताओं और जनप्रतिनिधियों से पुरजोर अपील की है कि वे संयम बरतें, कानून हाथ में न लें और संयंत्र के किसी भी द्वार को अवरुद्ध न कर आवागमन को पूरी तरह सामान्य बनाए रखने में प्रशासन को सहयोग दें।
